राहुल वर्मा
मौसम तेरी चाहत के
मनभावन रंग बरसे हैं!
हर दिन पर लगा रंग नया
नैनन में मनोहर सजते हैं!
सुबह सवेरे की बारिश
रिमझिम से फागुन तरसे हैं!
महकती हवाओं के आलिंगन को
बन भ्रमर बगिया भटके हैं!
कोहरे का दिन पहन चादर
मटमैली सुबह सुबह आ धमके हैं!
रेवड़ी की मिठास सहेजे मन में
धूप के सहरों को तरसे हैं!
खड़ा द्वारे तरूण बसंत तत्पर
स्वागत में सरसों के फूल लहराये हैं!
कलियाँ कलियाँ रस भर रसखान हुआ
बाली बाली यौवन छिटकाए है!
मौसम तेरी चाहत के
मनभावन रंग बरसे हैं!!